जब तक विचारों में पारदर्शिता और आत्मा का शुद्धीकरण नहीं हो तो, सभी कार्य तर्कविहीन हैं।
स्वयं पर विजय पाना और ईश्वर को पूर्ण समर्पित होना, दो बिंदु है एक ही रेखा के।
ईश्वर आलौकिक है और अद्भुत भी, परन्तु इसकी पहचान और उपस्थिति मनुष्य स्वयं की शक्ति से कर सकता है। मार्ग दुर्गम है, लेकिन असाध्य भी नहीं...!!!
🍁भगवान 🍁
स्वयं पर विजय पाना और ईश्वर को पूर्ण समर्पित होना, दो बिंदु है एक ही रेखा के।
ईश्वर आलौकिक है और अद्भुत भी, परन्तु इसकी पहचान और उपस्थिति मनुष्य स्वयं की शक्ति से कर सकता है। मार्ग दुर्गम है, लेकिन असाध्य भी नहीं...!!!
🍁भगवान 🍁
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