इतिहास स्वयं को दोहराता है। समय, दिन और दिनांक बदलती हैं। शेष कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आता। सिर्फ़ बदलाव आता है, हमारे सोच, कार्यशैली और जीवन के प्रति अपने नजरिए में।
समय गतिमान भी है और अडिग भी। जो इसके संवेग में बिना गतिरोध दिखाए स्वतः स्वयं में परिवर्तन ले आता है, वही प्रगतिशील है और समझदार भी।
अतः वर्तमान में इस प्रगतिशील और गतिशील संसार में सजग और सहज होना अनिवार्य है...!!
समय गतिमान भी है और अडिग भी। जो इसके संवेग में बिना गतिरोध दिखाए स्वतः स्वयं में परिवर्तन ले आता है, वही प्रगतिशील है और समझदार भी।
अतः वर्तमान में इस प्रगतिशील और गतिशील संसार में सजग और सहज होना अनिवार्य है...!!
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